A2Z सभी खबर सभी जिले कीअन्य खबरेउत्तर प्रदेशताज़ा खबरदेश

सहारनपुर विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण का काला खेल

बिचौलियों की ‘सेटिंग’, स्टाफ की कमी और सिस्टम की चुप्पी से फल-फूल रहा भ्रष्ट तंत्र**

WhatsApp Image 2026 01 13 at 12.18.03 PM

**सहारनपुर विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण का काला खेल

बिचौलियों की ‘सेटिंग’, स्टाफ की कमी और सिस्टम की चुप्पी से फल-फूल रहा भ्रष्ट तंत्र**

सहारनपुर।
सहारनपुर विकास प्राधिकरण क्षेत्र इन दिनों अवैध निर्माण के एक बड़े और संगठित खेल का गवाह बन चुका है। नियम-कानूनों को दरकिनार कर बिना नक्शा पास कराए निर्माण कराना अब कोई अपवाद नहीं, बल्कि आम चलन बनता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि जिम्मेदार विभाग स्टाफ की कमी का रोना रो रहा है, जबकि बिचौलिए और दलाल इसी कमजोरी को अपनी ताकत बनाकर पूरे सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं।

प्राधिकरण क्षेत्र को प्रशासनिक सुविधा के लिए 12 जोनों में विभाजित किया गया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन 12 जोनों की निगरानी के लिए केवल चार जूनियर इंजीनियर (जेई) ही तैनात हैं। शहरी क्षेत्र के तेजी से विस्तार, नई कॉलोनियों और बढ़ती आबादी के बीच इतना सीमित स्टाफ न केवल अपर्याप्त है, बल्कि अवैध निर्माण को खुला न्योता भी देता है।

बिचौलियों का बोलबाला, कानून किनारे

सूत्रों की मानें तो इसी व्यवस्था की कमजोरी का फायदा उठाकर कुछ ब्रोकर और दलाल पूरे प्राधिकरण क्षेत्र में खुलेआम सक्रिय हैं। ये बिचौलिए आम नागरिकों को यह भरोसा दिलाते हैं कि नियमों और नक्शों की कोई जरूरत नहीं, बस “सेटिंग” होनी चाहिए। लोग भी सीधे प्राधिकरण कार्यालय जाने के बजाय इन्हीं दलालों के चक्कर में फंस जाते हैं।

दो नाम, जिनकी हर जगह चर्चा

प्राधिकरण क्षेत्र में एक ही समाज से जुड़े दो प्रभावशाली ब्रोकर — मिढ्ढा और ग्रोवर — के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। बताया जाता है कि ये दोनों खुद को पूरे प्राधिकरण क्षेत्र का “सर्वेसर्वा” बताते हैं। आम जनता को यह कहकर भ्रमित किया जाता है कि विभाग में उनकी सीधी पकड़ है और बिना किसी दिक्कत के हर तरह का निर्माण पास करा सकते हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि कई ऐसे निर्माण इन्हीं के जरिए कराए गए हैं, जिनका नक्शा नियमों के अनुसार कभी पास ही नहीं हो सकता था।

मनमानी वसूली, सरकारी राजस्व को सीधा नुकसान

इन बिचौलियों द्वारा निर्माण कराने के नाम पर निर्माण लागत से कई गुना अधिक रकम वसूली जा रही है। इसका सबसे बड़ा नुकसान दो स्तरों पर हो रहा है। पहला, आम नागरिक आर्थिक रूप से ठगे जा रहे हैं। दूसरा, सरकार को मिलने वाला वैध राजस्व सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। जो पैसा विकास प्राधिकरण और सरकारी खजाने में जाना चाहिए, वह बिचौलियों की जेब में जा रहा है।

अवैध निर्माण से बढ़ता हादसों का खतरा

अवैध प्लॉटिंग, तंग गलियों में खड़े किए गए बहुमंजिला भवन और मानकों के विपरीत निर्माण भविष्य में बड़े हादसों को न्योता दे रहे हैं। कई इलाकों में हालात ऐसे हैं कि फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तक मौके पर नहीं पहुंच पातीं। भूकंप, आगजनी या किसी अन्य आपात स्थिति में जान-माल के भारी नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता।

जिम्मेदारी किसकी?

यदि भविष्य में किसी अवैध निर्माण में दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी अंततः सहारनपुर विकास प्राधिकरण और संबंधित विभागों पर ही आएगी। सवाल यह भी उठता है कि जब अवैध निर्माण खुलेआम हो रहे हैं, तो क्या अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं?

सिस्टम कटघरे में

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सहारनपुर विकास प्राधिकरण इस पूरे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर स्टाफ की कमी का बहाना बनाकर हालात को यूं ही बिगड़ने देगा। आमजन में यह चर्चा तेज है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में सहारनपुर अवैध निर्माण की राजधानी बन सकता है।


रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक / ब्यूरो
खबर, विज्ञापन, विज्ञप्ति व सूचना हेतु संपर्क: 8217554083

 

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!